कुदरत का कहर ..........जे बी

by: sharu------ . (on: Aug 11, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: RAJ......N.....SHARU
..............कुदरत का कहर ..........जे बी
१.
कुदरत का देखो कैसा है अनोखा खेल
अकसर मौसम हुआ है हर तरफ बेमेल
कहीं कहीं मूसलाधार बारिश की धार
और कहीं कहीं है गर्मी और सूखे की मार ॥
...................................................................राज ॥३.44
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अगर बैठे रहे तो कुदरत के भरोसे
कुछ नहीं मिलता इंसान को आज कल
कुछ तो करके कुदरत को देना पड़ेगा मात
बादल को करो मजबूर भरसने को ........................शरू ३.50 p m
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२.
कुदरत के भरोसे ना बैठे तो क्या करें नहीं और कोई चारा
कुदरत के ही रहमों करम पर जीता है इंसान सभी बेचारा
कुदरत से टकराने की हिम्मत जब भी कोई भी इंसान
रहा नहीं फिर इस धरती पर उसका कोई नामो निशान ॥
..........................................................................राज॥३.५६ pm
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यह तो कोई बात नहीं हुई करना पड़ेगा कुछ
इतना साइंटिस्ट है अपने यहां बुला लो
नदी को बांध लो पानी को बहवो तुम्हारी और
बरसात की पानी नहीं तो नाले की पानी ही सही ..........शरू ४ pm
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३.
चाहे वेज्ञानिक बुला लो सेंकड़ों हजार
कुदरत से पा ना सका आज तक कोई पार
कुदरत से पार पाने का बस एक ही तरीका यार
कुदरत की इज्जत करो दिल से बारम्बार ॥
.........................................................................राज ॥४.०७ pm
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जो नुक्सान करना था कर गया इंसान
अब क्या करे कुछ तो कुछ करना ही है
बोलो कुदरत को हमें माफ़ करे और बरसे
या हम सब मिल के कुछ न कुछ करे ..........................शरू .४.१० p m
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx ..10.8.19
score: 9.14373
average: 9.0
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Comments

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473 days ago
AAP dono ne jo likha ek dum Sunder likha hAi
 
 
473 days ago
Nature jo bhi kar Rahi hai vo humari galti ki saza de Rahi hai
 
 
473 days ago
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474 days ago
06
 
 
474 days ago
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474 days ago
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474 days ago
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