.....समय की खेल ............

by: sanvi * (on: Oct 26, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: sanaa
.. .........समय की खेल ............

बादल बरसते नहीं अकेले के लिए
बिजनेवाला तुम अकेला नहीं यार
जाड ,पौधे, पत्थर ,कांटे ,नदी,नाले
बिज जाते हैं गधे , कुत्ते,सियार ............

आज जो अमृत लगता है तुझे
कल वही विष सा लग सकता है
सब समय की खेल है भैया सुनो
आज जो है कल न रहेगा अपना

तीन माह करने चली बरा बरी
तीन साल के साथ आंख मिचोली
काया की सुंदरता तो ढल जाएगी
वक्त के साथ ,रहेगी मन की गुण

केवल तन की सौंदर्य काम नहीं आती
मन के भी सब को होना चाहिए धनि
सोने की सुई है किस काम की होती
गरीब संभल न पायेगा सफ़ेद हाथी ..........सना
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Comments

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396 days ago
Ya Avery thing depends on TIME
 
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