.धन -दौलत भी ज़रूरी...

by: sharu . (on: Nov 24, 2019)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: RAJ......N.....SHARU
..........धन -दौलत भी ज़रूरी..............
1
पैदल चल पड़ा मैं तुझसे मिलने को .
होके दुनियादारी और अपनों से दूर .
एक तो मुम्बई है राजस्थान से बहुत दूर .
पर तुझसे मिलने को इस दिल किया मुझे मजबूर .......BY राज .7.45 PM

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इतना भी क्या था मज़बूरी यार ..?
राजस्थान की लडकियां होती हैं बहुत सुन्दर ,
इसके लिए मुंबई तक आने की क्या थी जरुरत ..?
मुंबई की मराठी लड़की होती है बहुत थीका .. ( like chilli )...by शरू 7.54 पं

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2.
न ही सुन्दर लड़की चाहिए न ही थीका की दरकार .
तुम्हारी सौंदर्य बसी है दिल में , हुआ है प्यार .
तपते रेगिस्तान से पैदल बिन हाथी और घोडा .
तेरे लिए मैं o जनम , चला आया भागा दौड़ा . ...By....राज ..8.16 PM

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मगर हमें तो घोड़े में बैठ कर ,
आनेवाले ले के हाथ में तलवार
राजकुँवर की बचपन से ,थी इंतज़ार ,
हम बिलकुल नहीं पैदल चलनेवाले ,
मंगावो ऊंट , हाथी और घोड़े ............. ...............by शरू 8. 26 PM

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3
दिल का राजा हूँ मैं , जहां करता हूँ मैं हुकूमत .
क्या तुम्हारे दिल में सच्चे प्यार की नहीं कोई कीमत ?.
कामिनी , हक़ीक़त तो यह है की दौलत से हूँ मैं गरीब .
दिल से करता हूँ प्यार और रहता हूँ दिल के क़रीब . By...... राज 8.38 PM

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अच्छा ,आप हो सिर्फ नाम के राजकुमार ,
और कुछ नहीं आप के पास , आप हो फ़क़ीर ,
क्या पेट भरेगा इज्जत से आप का यह नायाब प्यार ..?
धन -दौलत भी जीने के लिए होती है बहुत ज़रूरी ,.......BY शरू 8.45 pm
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Comments

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45 days ago
तोड कर देख लिया, आईना-ए-दिल तूने ...
तेरी सूरत के सिवा और बता क्या निकला।

इसका रोना नही क्यूं तुमने किया दिल बरबाद,
इसका गम है कि बहुत देर से बरबाद किया।

किसी शायर की शायरी है ये, मेरी अपनी रचना नही है।
 
 
45 days ago
गजब की पंक्तिया, पागलपन की हद तक चाहत की अभिव्यक्ति .... पैदल चल पडा था मैं तुझसे मिलने, ....
मुम्बई से राजस्थान है बहुत दूर, पर तुझसे मिलने को इस दिल ने किया मजबूर। शायद ईश्क की दुनियां मे इसी को दीवानगी कहते होंगे जहा माशूका से मिलने आशिक सात समंदर पार तक जाने का जज्बा रखते हों वहां राजस्थान से मुम्बई की पैदल दूरी कुछ भी नही
हम भी किसी जमाने में जाते थे पंजाब से तमिलनाडू, दिसंबर की भरी सर्दी में बसे बदल बदल कर धक्के खाते हुए सिर्फ उसे देखने और छूने के लिए। आपने इस कविता के जरिए गुजरा जमाना याद दिला दिया मैडम जी।🙏🙏🙏🙏
 
 
45 days ago
Rating: 10
 
 
423 days ago
Nice work, SharuRaj .
 
 
423 days ago
Rating: 7
 
 
423 days ago
Very nice
 
 
423 days ago
Rating: 10
 
 
423 days ago
Very nice
 
 
423 days ago
Rating: 10
 
 
424 days ago
So nice
 
 
424 days ago
Rating: 10
 
 
424 days ago
nice 👌
 
 
424 days ago
Rating: 10
 
 
424 days ago
VERY NICE SHARU
 
 
424 days ago
Rating: 10
 
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