कैसे कह दूँ

by: N Kumar (on: Jun 24, 2020)
Category: Poem   Language: Hindi
tags: कैसे कह दूँ
कैसे कह दूँ, मुझको उससे प्यार नहीं है
मरता है दिल जिस पर,उसका इंतज़ार नहीं है

खोयी-खोयी रहती हूँ, जिसके दीदार में
हर पल, तनहा दिल उसका बीमार नहीं है

दोनों जहाँ हारे जिसकी मुहब्बत में,उसके
सुख-दुख से हमारा कोई सरोकार नहीं है

वही तो है मेरी अफ़कार,अशआर की दुनिया
उसके सिवा, दूसरा कोई ख़तावार नहीं है

बेशकीमती है यह गमगाही मुहब्बत, मगर
बिके जहाँ में, बना ऐसा कोई बाज़ार नहीं है

कैसे कह दूँ कि मुलाकात नहीं होती है
रोज़ मिलते हैं मगर बात नहीं होती है

आप लिल्लाह न देखा करें आईना कभी
दिल का आ जाना बड़ी बात नहीं होती है

छुप के रोता हूँ तेरी याद में दुनिया भर से
कब मेरी आँख से बरसात नहीं होती है

हाल-ए-दिल पूछने वाले तेरी दुनिया में कभी
दिन तो होता है मगर रात नहीं होती है

जब भी मिलते हैं तो कहते हैं कैसे हो "शकील"
इस से आगे तो कोई बात नहीं होती है
score: 9.37792
average: 10.0
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Comments

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51 days ago
गहरी चोट खाया व्यक्ति ही ऐसी कविता लिख सकता है
 
 
51 days ago
Rating: 10
 
 
170 days ago
Rating: 10
 
 
170 days ago
क्या अजीब था उनका मुझे छोड़ के जाना,
सुना कुछ नहीं और कहा भी कुछ नहीं,
कुछ इस तरह बर्बाद हुए उनकी मोहब्बत में,
लुटा भी कुछ नहीं और बचा भी कुछ नहीं।
 
 
216 days ago
Nice
 
 
216 days ago
Rating: 8
 
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